एक फिल्म स्टार और एक पत्रकार मॆ फर्क देखिए जब्के दोनो इंसान है

विनोद खन्ना ऑफ हो गया सबको पता चल जाता है लेकिन कोई गरीब पत्रकार ऑफ हो जाये तो किसी को पता नही चलता और हमारे मीडीया मित्र न्यूज़ चेनेल ब्रेकिंग न्यूज़ चला देते है की बड़े फिल्म स्टार ऑफ हो गये लेकिन गरीब युवा  पत्रकार की मौत की  ब्रेकिंग न्यूज़ कोई नही चलाता और ना दुखद व्यकत करता हमारे मीडिया मित्रों आज नही तो कल हमे भी मरना है फ़िर हमे भी कोई याद नही करेगा.और
पत्रकार फैजूल शैख की कलम से एक कड़वा सच.

पत्रकार फैजूल शैख की कलम से एक कड़वा सच.

इस युवा गरीब पत्रकार के परिवार  का क्या होगा इसको कौन देखेगा हम पत्रकारों के लिये ना ही केंद्र सरकार ने कूछ रिलीफ फंड बनाया है और नाहि राज्य सरकार ने तो फ़िर हम पत्रकारों के लाचार बेबस परिवार कहाँ जाये क्या भीख माँगे क्या या ऊन परिवारों को ऐसे ही मरने छोड़ दें
पत्रकार फैजूल शैख की कलम से एक कड़वा सच.

पत्रकार फैजूल शैख की कलम से एक कड़वा सच.

कहने को तो हम पत्रकार लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ है लेकिन हमारे लिये कोई सुविधा ही नही ऐसा सौतेला व्यवहार लोकतंत्र के इस स्तम्भ के साथ क्यू अब हम पत्रकारों को एक होना होगा भाईयों और सरकार से हमारा हक माँगना होगा नही तो येह दूर्दशा आज किसी और के साथ है और कल हमारे साथ भी हो सकता है.

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